सफलता पाने के लिए स्वयं को समझना अतिआवश्यक है। आप भी स्वयं को सही से समझने का प्रयत्न कीजिये, स्वयं का समुचित मूल्यांकन कीजिये और उसके बाद स्वयं को उसके अनुसार बदलने का प्रयास कीजिये। इन सब के लिए अपने दिमाग को निम्न तथ्यों से बार बार याद कराते रहिये-
1. अपने को स्वीकार कीजिये - आप जो भी है, जैसे भी है, जहाँ भी है उसी रूप में अपने को स्वीकार कीजिये। आप अत्यंत प्रतिभावान है, आकर्षक है, सुयोग्य है, हंसमुख है और लोकप्रिय है। इसलिए आप स्वयं को मान सम्मान दीजिये। सर्वशक्तिमान ईश्वर आपका पिता है आपको उसका पूर्ण स्नेह प्राप्त है, आपको वो अत्यंत चाहता है और सर्वाधिक मेहत्वपूर्ण यह है की आप उसे पूर्णतः स्वीकार है। तो अब आपको ही स्वयं को स्वीकारने में क्या आपत्ति है, जबकि अनेक व्यक्तियो ने तो आपको बहुत पहले ही स्वीकार किया हुआ है।
2. अपने में विश्वास रखिये - खुद पर आप सुदृढ़ विश्वास रखिये। इस श्रेष्ठ विश्वास को किसी भी परिस्थिति में डगमगाने न दीजिये। भगवान ने अपने समान ही महानता देने वाले अनगिनत उपहारों से आपको सुसज्जित करके भेजा है।
3. अपने से श्रेष्ठ व्यवहार कीजिये - जिस तरह अन्य लोगो से अच्छे व्यवहार करने और उनसे भी अच्छे व्यवहार पाने के लिए आप इच्छुक रहते है उसी प्रकार का व्यवहार अपने आप से भी कीजिये। अपने दिमाग को उसी प्रकार विश्राम दीजिये जिस प्रकार आप अपने शरीर को विश्राम देते है। दिमाग को दिया गया थोडा सा भी विश्राम आप में नवीन ऊर्जा , सकारात्मक सोच लाएगा।
4. अपने को सदैव व्यस्त रखिये - आप अपने दिमाग को सदैव व्यस्त रखिये। शारीरक और मानसिक रूप से कुछ न कुछ करते रहिये। यदि आप शारीरक रूप से थक जाये तो मानसिक कार्य करके शरीर को विश्राम दीजिये और यदि मानसिक रूप से थक जाये तो कुछ हल्का फुल्का शारीरिक कार्य करके दिमाग को विश्राम दीजिये। इस बात को हमेशा याद रखिये -"खाली दिमाग शैतान का घर।"
5. अपने को सदैव प्रसन्न रखिये - अपने दिमाग को सदैव प्रसन्न रहने के अवसर दीजिये तभी तो वो आपके जीवन में प्रसन्नता के मोती बिखरेगा। ख़ुशी से किये गए कार्य सदैव अच्छे ही होते है और दुःखी मन से किये गए कार्य हमेशा गलत होते है।
6. अपनी भूलो को भूलिये- भूतकाल में हुई स्वयम् की गलतियों को भूलने का हमेशा प्रयास करिये, जो हो गया सो हो गया, उसकी क्यों व्यर्थ चिंता करना, भूत का क्या पश्चाताप करते रहना, उसके लिए हमेशा क्या रोना?
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1. अपने को स्वीकार कीजिये - आप जो भी है, जैसे भी है, जहाँ भी है उसी रूप में अपने को स्वीकार कीजिये। आप अत्यंत प्रतिभावान है, आकर्षक है, सुयोग्य है, हंसमुख है और लोकप्रिय है। इसलिए आप स्वयं को मान सम्मान दीजिये। सर्वशक्तिमान ईश्वर आपका पिता है आपको उसका पूर्ण स्नेह प्राप्त है, आपको वो अत्यंत चाहता है और सर्वाधिक मेहत्वपूर्ण यह है की आप उसे पूर्णतः स्वीकार है। तो अब आपको ही स्वयं को स्वीकारने में क्या आपत्ति है, जबकि अनेक व्यक्तियो ने तो आपको बहुत पहले ही स्वीकार किया हुआ है।
2. अपने में विश्वास रखिये - खुद पर आप सुदृढ़ विश्वास रखिये। इस श्रेष्ठ विश्वास को किसी भी परिस्थिति में डगमगाने न दीजिये। भगवान ने अपने समान ही महानता देने वाले अनगिनत उपहारों से आपको सुसज्जित करके भेजा है।
3. अपने से श्रेष्ठ व्यवहार कीजिये - जिस तरह अन्य लोगो से अच्छे व्यवहार करने और उनसे भी अच्छे व्यवहार पाने के लिए आप इच्छुक रहते है उसी प्रकार का व्यवहार अपने आप से भी कीजिये। अपने दिमाग को उसी प्रकार विश्राम दीजिये जिस प्रकार आप अपने शरीर को विश्राम देते है। दिमाग को दिया गया थोडा सा भी विश्राम आप में नवीन ऊर्जा , सकारात्मक सोच लाएगा।
4. अपने को सदैव व्यस्त रखिये - आप अपने दिमाग को सदैव व्यस्त रखिये। शारीरक और मानसिक रूप से कुछ न कुछ करते रहिये। यदि आप शारीरक रूप से थक जाये तो मानसिक कार्य करके शरीर को विश्राम दीजिये और यदि मानसिक रूप से थक जाये तो कुछ हल्का फुल्का शारीरिक कार्य करके दिमाग को विश्राम दीजिये। इस बात को हमेशा याद रखिये -"खाली दिमाग शैतान का घर।"
5. अपने को सदैव प्रसन्न रखिये - अपने दिमाग को सदैव प्रसन्न रहने के अवसर दीजिये तभी तो वो आपके जीवन में प्रसन्नता के मोती बिखरेगा। ख़ुशी से किये गए कार्य सदैव अच्छे ही होते है और दुःखी मन से किये गए कार्य हमेशा गलत होते है।
6. अपनी भूलो को भूलिये- भूतकाल में हुई स्वयम् की गलतियों को भूलने का हमेशा प्रयास करिये, जो हो गया सो हो गया, उसकी क्यों व्यर्थ चिंता करना, भूत का क्या पश्चाताप करते रहना, उसके लिए हमेशा क्या रोना?
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